
एक दीवार हमेशा
बनी रही
दोनो के बिचमे
माहिर थे दोनो
अपने हिस्से का काम करने मे !
एक इंट इसने उठाई
दूसरी उसने-
एक बार उसने
मिट्टी डाली
एक बार इसने.
पानी भी
डालने मे कोई कसर
नही छोड़ी थी दोनो ने –
दीवार को पक्की बनाने मे.
माहिर थे ना दोनो
अपने हिस्से का
काम करने मे !
किसी ने जो
कोशिश की होती
एक बार
ही सही
इंट रखने से
पहेले सिर्फ़
उस तरफ़ जाने की-
शायद ,
शायद ही सही
दीवार बीच मे ना होती.
दीवार के एक
तरफ़ दुनिया होती-
दूसरी तरफ़
सिर्फ़ इस ओर उस होते-
एक साथ.
पर
दोनो ने अपना अपना काम
पूरी ईमानदारी से किया था !?

