Friday, July 4, 2008

~~~ ईमानदारी!!?? ~~~

एक मूवी देखि थी ....TRANSLATED थी शायद .. मूवी का नाम था TURN LEFT, TURN RIGHT ..... उस पर से प्रेरित होकर ये कविता लिखा थी मैंने....शायद किसी को पसंद आ जाये ....




एक दीवार हमेशा
बनी रही
दोनो के बिचमे

माहिर थे दोनो
अपने हिस्से का काम करने मे !

एक इंट इसने उठाई
दूसरी उसने-
एक बार उसने
मिट्टी डाली
एक बार इसने.
पानी भी
डालने मे कोई कसर
नही छोड़ी थी दोनो ने –
दीवार को पक्की बनाने मे.

माहिर थे ना दोनो
अपने हिस्से का
काम करने मे !

किसी ने जो
कोशिश की होती
एक बार
ही सही
इंट रखने से
पहेले सिर्फ़
उस तरफ़ जाने की-

शायद ,
शायद ही सही
दीवार बीच मे ना होती.

दीवार के एक
तरफ़ दुनिया होती-
दूसरी तरफ़
सिर्फ़ इस ओर उस होते-
एक साथ.

पर
दोनो ने अपना अपना काम
पूरी ईमानदारी से किया था !?

Tuesday, July 1, 2008

~~~ 21 वीं सदी की लड़की का इंतज़ार ~~~

हिन्दी में जब लिखना शुरू किया कुछ एक साल पहले ...तब एक क्षणिका लिखी थी ... जो आज भी मुझे बेहद पसंद है.... इंटरनेट पर काम करने वालो के लिए बहोत सारे हम जैसे लोगो के लिए गूगल का काफ़ी इंपॉर्टेन्स है .... सोचा की कुछ वक्त के बाद हो सकता है ऐसा भी दिन आएगा .....और ना जाने कही आ ही चुका हो ...... जय हो गूगल की .... !!!




21 वीं सदी की लड़की का इंतज़ार

किसीने
कहा
गूगल
सर्च
एंजिन
में
ढुंढ़ो
तो
मिल
जाता
है .....


कब
से
तेरा
नाम
डालके
बैठी
हूँ ....

Friday, June 27, 2008

~~~ छल्ला ~~~


बड़े प्यार से पहनाया था
पिछले साल की पूर्णिमा को
चाँदी सा चमकता
हीरे का दमकता
छल्ला, बाँये हाथ की पीछे से दूसरी उंगली मे.

वक्त क्यू पीछे छूट गया
साथ जाने कब टूट गया
कितनी काली रात है आज
आकाश में लटकते हुए चमक रहा है
बहोत बेशरम है तुम्हारा छल्ला.

Thanks for photo Priyesh :)
http://www.flickr.com/photos/ranjanpriyesh/

Wednesday, June 25, 2008

~~~ एक दिन ~~~


एक दिन ऐसा भी आएगा
मेघधनुष जैसी तेरी याद
अचानक कभी आ जाएगी
चेहरे पर मेरे, शायद तब भी
ऐसी ही ख़ुशी छा जाएगी
एक दिन ऐसा भी आएगा
मैं उस दिनके इंतज़ारमे हू

बारिशमे अचानक धूप की तरह
कभी फिर बरस जाएगी, आँखे मेरी
तेरी याद मुजे
फ़िरसे नम कर जाएगी
एक दिन ऐसा भी आएगा
मैं उस दिनके इंतज़ारमे हू ...

क्या हुआ जो तुजे
भूलने की कोशीशे करता ही रहता हू
क्या हुआ जो, जितना जीता हू
उससे ज़्यादा मैं मरता ही रहता हू
एक दिन ऐसा भी आएगा
फिर कोई इंतज़ार ही नही रहेगा
मै बस, उस दिनके इंतज़ार मैं हू ...

Wednesday, March 26, 2008

~~~ तेरे आने से~~~

खामोशीओ के मतलब कुछ यूँ निकलते है
देखो सनम अब हम बर्फ से पिघलते है

कसम ली थी जिन्होने उम्रभर ना बहकने की
प्यार की खातिर आज वो भी खुद बदलते है

जाती नही थी राह उस मंज़िल की ओर कोई
सारे मोड़ आज क्यू बस वही निकलते है

खामोश सी जिंदगी के लबो पर तेरे आने से
बिन महफ़िल के भी रोज़ जाम छलकते है

तुम्हे देखकर आज यूँ इतने पास मेरे
अरमा भी देखो मेरे किस तरह मचलते है

~~~तकदीर ... ~~~

गहरी शाम का टीका
लगाके भेजा था उसने
नज़र ना लग जाए कही
ना जाग जाए भूले से भी
तकदीर जब भेजी थी
अमावस की ही रात बची होगी

धूप से भी जलती है, काली
हो जाती है हर बार
तपती है हर बार हरे – पीले
लाल – लाल रंगो में, पर
जाने क्यू काला सा टीका ही मिलता है
नज़र ना लग जाए कही

काली सी आँखो में बात कोई
चुपचाप रहती है , मिलती नही
लब्जो से, रहती है अनकही,
मूंद लू पलके तो
शायद पता है मुझे,
रोशनी ही मिलेगी अब की बार.

Wednesday, February 20, 2008

~~~……प्यार करती हूँ. ~~~

कुछ अजनबी-सा था
अब जाना पहचाना लगता है
रोज़ मिलती हूँ
और रोज़ खिलती हूँ
वो शख्स है कोई
पर मैं सूरजमुखी सा मचलती हू ..

इंतज़ार में रहती है आँखे
और कुछ देखने को इनकार करती है
कहे नही पाती जो ज़ुबान
उंगलिया खुद ही इज़हार करती है
करने की सारी बाते
हो जाती है खुद-ब-खुद
और सरक जाता है दिन
चुपके – से, दबे पाव …
ठहरने की हर कोशिश नाकाम होती है
चलना होता है मुझे पर …
तितली की तरह उड़ती रहती हूँ …

जाने क्या हुआ है मुझे तुमसे मिलकर
तुमको मिलती हू की जैसे खुदको मिलती हूँ
टुकड़ो में बंटी हुई जिंदगी
सँवारती हू और खुद भी सजती हूँ…

आहट हो तुम्हारी या जैसे जिंदगी नई
रोज जीती हू और रोज तुम पर मरती हू
बात क्या है ये जानती नही मगर … तेरे कारण..
अब मैं खुदसे भी प्यार करती हूँ….